Delhi Tourist places | agrsen ki baoli | Ugrsen ki baoli | tourism | Tou...



namskar dosto apka bharat bharman k fresh vlog m bhut bhut swagat hai
fir se ek naya din or ek nai jagh to aaj hum Chalenge Agresen ki baoli jise ugresen ki baoli bhi kaha jata hai 

aap Delhi metro ka use krke yha pahunch sakte hai iske liye apko Rajiv chowk pr exit krke auto ya riksha lena hoga kyuki 
metro ststion se iske distance approx 1.5km hai

aur agr aap apne personal vichle se aa rhe hai to apko parking ki problem ho sakti kyuki yha official parking nhi hai

baoli m entry k liye koi charge nhi hai app yha free visit kr sakte hai

delhi ki sabse khubsurat jagh yani canought place ke pass m isstith yh baoli  Archaeological Survey of India k dwara sangrakchhit hai

माना जाता है कि महाभारत काल में ही इसका निर्माण करवाया गया था, लेकिन बाद में अग्रवाल समाज के महाराजा अग्रसेन ने इसका जीर्णोद्धार कराया, जिसके बाद इसे 'अग्रसेन की बावली' के नाम से जाना जाने लगा। 
हालांकि अब तक इससे संबंधित कोई ऐसी ऐतिहासिक जानकारी नहीं मिली है जिससे इस स्माकर के निर्माता की आधिकारिक पुष्टी हो सके।

 यह बावली basically 60 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा एक कुआं है 
jisme नीचे तक पहुंचने के लिए करीब 103-105 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं।
पुराने जमाने में पानी को बचाने के लिए इस तरह की बावली को बनाया जाता था। 
यह दिल्ली की उन गिनी-चुनी बावलियों में से एक है, जो अभी भी अच्छी Condition m hai
एक समय में दिल्ली और पुरानी दिल्ली के लोग यहां तैराकी सीखने के लिए आते थे।
kuchh time pahle tak iss  बावली का कुआं काले रंग के पानी से भरा हुआ था।
yh baoli jayada fameus Pk movie or SUltan movie ki Souting k baad hui hai or iss pahle bhi yha kai movie ki souting ho chuki hai jese 'झूम बराबर झूम' 


देश ke सबसे horror places की सूची में इस baoli ka नाम भी शामिल है। ऊपर-ऊपर से तो यह बावली लाल बलुए पत्थरों से बनी दीवारों के कारण बेहद सुंदर लगती है, लेकिन आप जैसे -जैसे इसकी सीढ़ियों से नीचे उतरते जाते हैं, एक अजीब सी गहरी चुप्पी फैलने लगती और आकाश गायब होने लगता है।
इस बावली के तमाम ऐसे अनसुलझे रहस्य हैं, जो आज तक राज ही हैं। 


बावली के शून्य शांत वातावरण में पत्थर की ऊंची-ऊंची दीवारों के बीच जब कबूतरों की गुटरगूँ और चमकादड़ों की चीखें और फड़फड़ाहट गूंजती है, तो बावली का माहौल पूरे शरीर में सिहरन पैदा कर देता है। कई बार तो यहां आने वालों ने किसी अदृश्य साया को भी महसूस किया है। 


बावली के पश्चिम ke कोने में एक छोटी सी मस्जिद भी बनी है की ओर jiske 3 entry Gate hai

apko video achhi lagi ho to video ko like kre share kare or channel ko subscribe kre 
jai Hind   jai Bharat

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